संवाददाता/मुंबई मुद्दा
RNI No: MHHIN/26/A2673
मुंब्रा: बढ़ती आबादी के साथ शहर में यातायात और सार्वजनिक रास्तों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में फुटपाथ पर अतिक्रमण, सड़क किनारे लगने वाली दुकानें, फैला हुआ सामान और बेतरतीब पार्किंग के कारण पैदल चलने वाले नागरिकों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।फुटपाथ आम नागरिकों के सुरक्षित पैदल आवागमन के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन कई जगहों पर इनका इस्तेमाल दुकानों का सामान रखने, ठेले लगाने और अन्य गतिविधियों के लिए होता दिखाई देता है। इसका सीधा असर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांग नागरिकों पर पड़ता है।
वहीं, सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग और अतिक्रमण के कारण कई प्रमुख रास्तों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है और व्यस्त समय में ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है। इसका खामियाजा आम नागरिकों को समय, ईंधन और परेशानी के रूप में भुगतना पड़ता है।
फुटपाथ आखिर किसके लिए?
सवाल यह है कि अगर फुटपाथ पर ही पैदल चलने की जगह नहीं बचेगी, तो नागरिक सुरक्षित तरीके से सड़क पर कैसे चलेंगे? क्या संबंधित विभागों की ओर से नियमित कार्रवाई और निगरानी नहीं होनी चाहिए?
मुंब्रा के नागरिकों का सवाल सीधा है—अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग पर कार्रवाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? प्रशासन कब जागेगा और आम लोगों को राहत कब मिलेगी?
अब जरूरत सिर्फ कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की है जिससे कार्रवाई के बाद दोबारा अतिक्रमण न हो।