इस बदलाव के बाद सबसे बड़ा सवाल दीवा प्रभाग समिती की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। अगर इस निर्माण के लिए सभी जरूरी अनुमति मौजूद थीं, तो क्या संबंधित अधिकारियों ने समय-समय पर इसकी जांच की? और अगर अनुमति नहीं थी या निर्माण स्वीकृत प्लान से अलग था, तो निर्माण शुरू होने से लेकर शोरूम शुरू होने तक अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
❓ अधिकारियों की निगरानी पर सवाल
मुंब्रा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में मुख्य सड़क के किनारे व्यावसायिक निर्माण कोई छोटी बात नहीं है। ऐसे निर्माण में जमीन का उपयोग, बिल्डिंग परमिशन, पार्किंग, सेटबैक और अन्य नियमों का पालन जरूरी होता है।
लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या दीवा प्रभाग समिती के संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था? अगर किया था तो क्या अनियमितता नजर नहीं आई? और अगर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इतनी तेजी से निर्माण पूरा होकर शोरूम कैसे शुरू हो गया?
अब स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि इस निर्माण को लेकर कौन-कौन सी अनुमति दी गई है और क्या निर्माण उन्हीं मंजूरियों के अनुसार हुआ है।
Mumbai Mudda का सवाल सीधा है—अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो दस्तावेज सामने रखिए, और अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
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